एशिया कप 2025 के सुपर-4 मैच के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐसा विवाद उभरा, जो मैदान के बाहर तक पहुँच गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के खिलाड़ियों हारिस रऊफ और साहिबजादा फरहान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके जवाब में PCB ने सूर्यकुमार यादव के खिलाफ विरोध दर्ज किया। यह सब दुबई में 21 सितंबर 2025 को खेले गए मैच के बाद शुरू हुआ — एक ऐसा मैच जिसकी पृष्ठभूमि में कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले और भारत के आपरेशन सिंदूर का भारी राजनीतिक बोझ था।
उकसाने वाले इशारे और टॉस का नो-हैंडशेक
मैच के दौरान हारिस रऊफ ने भारतीय फैंस की ओर गुस्से में ‘6-0’ का इशारा किया और एक विमान के गिरने की नकल की — जो भारतीय टीम के लिए एक स्पष्ट अपमान माना गया। दूसरी ओर, साहिबजादा फरहान ने पचास रन बनाने के बाद पख्तून संस्कृति के अनुसार ‘गन सेलिब्रेशन’ किया, जिसे BCCI ने ‘उकसाने वाला आचरण’ बताया। लेकिन विवाद का सबसे ज्यादा चर्चा हुआ जब सूर्यकुमार यादव ने टॉस के बाद पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा को हाथ नहीं मिलाया। यह नो-हैंडशेक भारतीय टीम के लिए एक राजनीतिक संदेश माना गया — खासकर जब दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बरकरार है।
ICC की सुनवाई और सजाएँ
शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को रिची रिचर्डसन, ICC के एलीट पैनल रेफरी, ने दुबई के एक होटल में सुनवाई की। पाकिस्तानी टीम के मैनेजर नवीद अकरम चीमा भी उपस्थित थे। ICC का फैसला आया — सूर्यकुमार यादव को आचार संहिता के अनुच्छेद 2.21 के तहत दोषी पाया गया। उन पर मैच फीस का 30% जुर्माना लगाया गया और दो डिमेरिट अंक दिए गए। यह एक चेतावनी है, न कि एक भारी सजा।
लेकिन हारिस रऊफ के लिए यह अलग कहानी है। ICC ने उन पर दो अलग-अलग आचार संहिता उल्लंघन के लिए दो मैचों का बैन लगाया: 14 और 28 सितंबर 2025। दोनों मैचों के लिए अलग-अलग 30% जुर्माना लगाया गया — कुल 60% — और दो-दो डिमेरिट अंक दिए गए। इससे उनके 24 महीने के अंदर चार डिमेरिट अंक हो गए। यह एक बहुत बड़ी बात है। ICC के नियम के अनुसार, अगर कोई खिलाड़ी 24 महीने में चार डिमेरिट अंक जमा कर लेता है, तो उसे अनिवार्य रूप से दो मैचों का बैन लगता है।
पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती
हारिस रऊफ की अनुपस्थिति एशिया कप 2025 का फाइनल दुबई में पाकिस्तान टीम के लिए एक बड़ी चोट है। वह टीम के सबसे तेज गेंदबाजों में से एक हैं, जिनकी गति और योजनाबद्ध गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों के लिए खतरा है। उनके बिना पाकिस्तान की गेंदबाजी लाइनअप कमजोर हो जाएगी। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसे विवाद हुए हैं — लेकिन इस बार फैसला सख्त और तकनीकी रूप से सटीक था।
साहिबजादा फरहान को सिर्फ चेतावनी मिली, लेकिन उनका बचाव दिलचस्प था। उन्होंने कहा कि गन सेलिब्रेशन पख्तून संस्कृति में एक पारंपरिक जश्न है, जिसे कोई अपमान नहीं मानता। लेकिन ICC के लिए खेल का आचार संहिता वैश्विक है — और संस्कृति का तर्क उल्लंघन के लिए पर्याप्त नहीं है।
पृष्ठभूमि: खेल के बाहर का युद्ध
यह मैच सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं था। यह अप्रैल 2025 में पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया पहला खेल था। उस हमले के बाद भारत ने आपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। इस तनाव के बीच, क्रिकेट एक एकमात्र ऐसा मंच बन गया जहाँ दोनों देश आमने-सामने आए। इसलिए, हर इशारा, हर हाथ न मिलाना, हर जश्न — सब कुछ राजनीतिक संदेश बन गया।
क्रिकेट ने कभी भी राजनीति को बाहर रखने का वादा नहीं किया है। लेकिन इस बार खेल ने राजनीति को अपने अंदर ले लिया। और अब ICC को उस राजनीति को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अगले कदम: डिमेरिट अंकों का खतरा
अगले 24 महीनों में, अगर सूर्यकुमार यादव, साहिबजादा फरहान या हारिस रऊफ में से कोई भी खिलाड़ी दो और डिमेरिट अंक जमा करता है, तो उसे एक नया बैन लग सकता है। यह एक ऐसा नियम है जो खिलाड़ियों को अपने व्यवहार पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर करता है। यह नियम सिर्फ एक बैन नहीं, बल्कि एक संदेश है: खेल का आदर बरकरार रखो, भले ही देश के बीच तनाव हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हारिस रऊफ को दो मैच का बैन क्यों मिला, जबकि साहिबजादा फरहान को सिर्फ चेतावनी?
हारिस रऊफ पर दो अलग-अलग गंभीर आचार संहिता उल्लंघन थे — ‘6-0’ इशारा और विमान की नकल — जो भारतीय फैंस के लिए अपमानजनक माने गए। इन दोनों के लिए अलग-अलग डिमेरिट अंक दिए गए, जिससे उनके 24 महीने में कुल चार डिमेरिट अंक हो गए। ICC के नियमानुसार, चार डिमेरिट अंक के बाद अनिवार्य रूप से दो मैचों का बैन लगता है। साहिबजादा फरहान का इशारा एक सांस्कृतिक अभ्यास था, जिसे ICC ने उल्लंघन के रूप में नहीं, बल्कि चेतावनी के रूप में देखा।
सूर्यकुमार यादव का नो-हैंडशेक वास्तव में आचार संहिता का उल्लंघन है?
हाँ। ICC के आचार संहिता के अनुच्छेद 2.21 के तहत, खेल को बदनाम करने वाला व्यवहार शामिल है, जिसमें टॉस के बाद विपक्षी कप्तान को हाथ न मिलाना शामिल है। यह एक आम रीति है, लेकिन नियम के अनुसार यह अनिवार्य है। ICC ने इसे गंभीर नहीं माना — बस 30% जुर्माना और दो डिमेरिट अंक लगाए — लेकिन यह एक स्पष्ट संकेत है कि खेल के नियमों का अनुपालन जरूरी है, भले ही राजनीति के तनाव के बीच हो।
एशिया कप 2025 का फाइनल में हारिस रऊफ की अनुपस्थिति का पाकिस्तान पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हारिस रऊफ पाकिस्तान की गेंदबाजी की अग्रिम लाइन में सबसे तेज और विनाशकारी गेंदबाज हैं। उनकी गति और डेथ ओवर में नियंत्रण भारतीय टीम के लिए बड़ी चुनौती है। उनकी कमी से पाकिस्तान को अपनी गेंदबाजी रणनीति बदलनी पड़ेगी, और शायद उनके अनुभवी गेंदबाजों को अधिक ओवर फेंकने पड़ेंगे। यह टीम के लिए एक बड़ी तकनीकी और मानसिक चुनौती है।
क्या यह विवाद भारत-पाकिस्तान के बीच आगे के क्रिकेट मैचों को प्रभावित करेगा?
संभावना है। ICC ने इस घटना के बाद खिलाड़ियों के व्यवहार पर अधिक निगरानी करने का इशारा किया है। अगले मैचों में टीमों को अपने खिलाड़ियों को बेहतर तरीके से तैयार करना होगा — न केवल खेल के लिए, बल्कि राजनीतिक तनाव के बीच आचरण के लिए। यह विवाद एक नया मानक स्थापित करता है: खेल के मैदान पर भी राजनीति के बारे में सावधान रहना होगा।
डिमेरिट अंक क्या हैं और वे कैसे काम करते हैं?
डिमेरिट अंक ICC के आचार संहिता का एक नियंत्रण तंत्र है। खिलाड़ियों को आचार संहिता उल्लंघन के लिए अलग-अलग अंक दिए जाते हैं — छोटे उल्लंघन के लिए 1, गंभीर के लिए 2। अगर कोई खिलाड़ी 24 महीने में चार डिमेरिट अंक जमा कर लेता है, तो उसे अनिवार्य रूप से दो मैचों का बैन लगता है। यह एक रोकथाम के रूप में काम करता है, ताकि खिलाड़ी अपने व्यवहार पर गंभीरता से विचार करें।
क्या भारत और पाकिस्तान के बीच आगे के क्रिकेट मैच होंगे?
अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन एशिया कप 2025 के बाद दोनों देशों के बीच अगला मैच शायद 2026 में आयोजित होने वाले ICC टी20 विश्व कप में हो सकता है। लेकिन यह विवाद दोनों बोर्डों के बीच संवाद को तनावग्रस्त कर रहा है। अगर आचार संहिता के नियमों को लागू करने में भी राजनीति शामिल हो गई, तो भविष्य के मैचों का आयोजन भी संदिग्ध हो सकता है।
pravin s
नवंबर 24, 2025 AT 19:48ये सब तो बस खेल का नहीं, राजनीति का खेल है। ICC ने जो फैसला दिया, वो तकनीकी तो है, लेकिन दिल से लगता है कि कुछ चीजें बदलनी चाहिए।
Bharat Mewada
नवंबर 24, 2025 AT 20:49क्रिकेट में हाथ मिलाना या न मिलाना - ये छोटी बात लगती है, लेकिन इसके पीछे दो देशों की भावनाएं छिपी हैं। इसे खेल के बाहर नहीं, खेल के अंदर ही सुलझाना होगा।
Narinder K
नवंबर 26, 2025 AT 16:07हारिस रऊफ को दो मैच का बैन? ओह बाप रे। अब तो भारतीय फैंस का दिल खुश हो गया। लेकिन अगर ये इशारे गलत हैं, तो सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना क्यों नहीं? दोहरा मानक फिर से दिख गया।
Narayana Murthy Dasara
नवंबर 27, 2025 AT 01:47साहिबजादा का गन सेलिब्रेशन अगर पख्तून संस्कृति का हिस्सा है, तो उसे समझना चाहिए। लेकिन जब दो देश इतने तनाव में हों, तो हर चीज बड़ी बात बन जाती है। ICC ने सही फैसला किया - चेतावनी दे दी, बैन नहीं। ये तो बहुत बड़ी बात है।
हारिस के इशारे तो बहुत गलत थे। उसने न सिर्फ खिलाड़ी, बल्कि फैंस को भी नीचा दिखाया। उसे बैन मिलना बिल्कुल ठीक है।
लेकिन ये सब अगर भारत-पाकिस्तान के बीच के तनाव के बिना होता, तो क्या इतना बड़ा विवाद होता? शायद नहीं।
अगर हम खेल को राजनीति से अलग करना चाहते हैं, तो खिलाड़ियों को भी इसकी जानकारी देनी होगी। उन्हें सिर्फ बैट और गेंद नहीं, बल्कि भावनाओं का भी अध्ययन करना होगा।
मैं नहीं चाहता कि कोई खिलाड़ी अपने जश्न में किसी को नुकसान पहुंचाए। लेकिन एक तरह का सम्मान तो होना चाहिए।
सूर्यकुमार को 30% जुर्माना? अच्छा हुआ। अगर ये बैन होता, तो लोग कहते कि भारत को फायदा हुआ। अब तो न्याय लग रहा है।
हारिस की कमी से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ। वो तो टीम का दिल था।
अगले मैच में अगर भारतीय खिलाड़ी भी कोई ऐसा इशारा कर दें, तो क्या उन्हें भी बैन मिलेगा? ये सवाल जवाब का इंतजार कर रहा है।
मैं चाहता हूं कि ये सब एक सीख बने - खेल खेल हो, लेकिन इंसान बने।
JAYESH KOTADIYA
नवंबर 27, 2025 AT 15:45भारत के खिलाफ इशारा किया = बैन। भारत का हाथ न मिलाना = जुर्माना। ये ICC का न्याय है? 😂
अब तो भारतीय फैंस तो खुश हो गए - दुश्मन को बैन, हमारा बल्लेबाज बच गया। बस अब लोग ये बोलेंगे कि भारत जीत गया।
अगर ये इशारे गलत हैं, तो हाथ मिलाना भी जरूरी है। दोहरा मानक फिर से दिख गया।
Vikash Kumar
नवंबर 29, 2025 AT 12:33हारिस रऊफ ने अपने आप को खेल से बाहर फेंक दिया। इशारे नहीं, बल्कि युद्ध का संदेश दिया। बैन तो बहुत हल्का है।
सूर्यकुमार ने हाथ नहीं मिलाया - ये बहादुरी नहीं, बल्कि बच्चों जैसा बर्ताव है।
PCB को चाहिए था कि अपने खिलाड़ियों को समझाए। अब ये बहाना बन गया कि संस्कृति थी।
Siddharth Gupta
नवंबर 30, 2025 AT 15:30इस बार खेल ने दिखाया कि ये बस खेल नहीं - ये एक जंग है।
लेकिन अगर हम इस जंग को खेल के अंदर छिपा रहे, तो क्या हम खुद को धोखा दे रहे हैं?
हारिस का इशारा बहुत गलत था - उसने भारतीय फैंस को नहीं, इंसानियत को चोट पहुंचाई।
सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना? अच्छा लगा। लेकिन नियम नियम है।
ICC ने दोनों तरफ से बराबरी से फैसला दिया। ये तो बहुत अच्छा है।
अगले मैच में अगर कोई भी खिलाड़ी इशारा करे, तो उसे बैन लगे - चाहे वो भारतीय हो या पाकिस्तानी।
खेल को राजनीति से अलग करना तो मुश्किल है, लेकिन उसे इतना बड़ा नहीं बनाना चाहिए।
मैं चाहता हूं कि एक दिन ऐसा हो - जब हारिस और सूर्यकुमार मिलकर एक बार बात करें।
क्यों नहीं? खेल तो इंसानों के लिए है।
Anoop Singh
दिसंबर 1, 2025 AT 20:22हारिस रऊफ को बैन देना बिल्कुल ठीक है, लेकिन सूर्यकुमार को जुर्माना देना बेकार है। भारत के खिलाफ इशारा करने वाले को बैन, भारतीय को जुर्माना? ये ICC का न्याय है? बस एक तरफ बस नियम लागू होता है।
हाथ मिलाना जरूरी है - लेकिन अगर तुम्हारा दिल नहीं चाहता, तो फिर क्यों मिलाओ? ये नियम बेकार है।
पाकिस्तान के खिलाड़ियों को बहुत ज्यादा दंड दिया गया। भारत के खिलाड़ियों को बचाया गया।
Omkar Salunkhe
दिसंबर 1, 2025 AT 21:42harris ka ban tha hi sahi... lekin suryakumar ko fine? yeh ICC kya kar raha hai? ye toh double standard hai... bhaiya yeh bhi dekh lo ki kisne kya kiya... aur kisne kya nahi kiya... ye toh bas political bias hai...
raja kumar
दिसंबर 2, 2025 AT 12:42हर खिलाड़ी के पास अपनी संस्कृति होती है, लेकिन खेल का नियम एक होता है। इसलिए ICC का फैसला सही है।
हारिस के इशारे ने खेल के आध्यात्मिक भाव को नुकसान पहुंचाया। वह एक खिलाड़ी था, लेकिन उसने खेल के नियमों को नहीं समझा।
सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना भी गलत था। लेकिन उनका जुर्माना बहुत हल्का था - ये एक संकेत था कि नियम को सम्मान दिया जाता है, लेकिन भावनाओं को भी।
हमें खेल को एक मंच के रूप में देखना चाहिए - जहां दोनों देश एक दूसरे के सामने आएं, लेकिन दिल से नहीं, नियम से बात करें।
अगर ये विवाद एक सीख बन जाए, तो भविष्य में कोई भी खिलाड़ी अपने इशारों के बारे में सोचेगा।
ये बैन और जुर्माना सिर्फ दंड नहीं, बल्कि एक शिक्षा है।
Sumit Prakash Gupta
दिसंबर 2, 2025 AT 16:42ये सब एक नेगेटिव वाइब्स सिस्टम का डायनामिक है। ICC ने एक रिस्क-बेस्ड गवर्नेंस मॉडल अपनाया है - जहां एक्शन और रिस्पॉन्स को रिकॉर्ड किया जाता है।
डिमेरिट अंक एक फॉर्मल इंटीग्रिटी मैट्रिक्स है। जिसमें हर वाइलेशन का वेटेज डिफाइन है।
हारिस के दो वाइलेशन्स - एक्सप्लिसिट अपमान और प्रोवोकेशन - दोनों के लिए 2 डिमेरिट्स दिए गए।
सूर्यकुमार का नो-हैंडशेक - एक ब्रेच ऑफ स्पोर्ट्समैनशिप - लेकिन उसका इम्पैक्ट लो है, इसलिए 2 डिमेरिट्स नहीं।
ये एक स्ट्रैटेजिक डिसिजन है। न सिर्फ डिसिप्लिनरी, बल्कि इमोशनल इंटेलिजेंस के लिए एक फ्रेमवर्क।
अगला स्टेप? खिलाड़ियों को इमोशनल इंटेलिजेंस ट्रेनिंग देना।
Shikhar Narwal
दिसंबर 3, 2025 AT 19:29हारिस का इशारा बहुत बुरा था - लेकिन सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना भी बुरा था।
ICC ने दोनों को बराबर बताया - ये तो बहुत अच्छा है।
अगर हम खेल को राजनीति से अलग करना चाहते हैं, तो खिलाड़ियों को भी ये समझाना होगा।
मैं चाहता हूं कि एक दिन हारिस और सूर्यकुमार मिलकर एक फोटो लें - हाथ मिलाते हुए। 😊
Ravish Sharma
दिसंबर 5, 2025 AT 05:15भारत के खिलाफ इशारा = बैन। भारतीय का हाथ न मिलाना = जुर्माना। ये ICC का न्याय है? नहीं। ये एक जाल है।
पाकिस्तान के खिलाड़ियों को दंड देना बिल्कुल ठीक है - लेकिन भारत के खिलाड़ियों को बचाना? ये तो राजनीति है।
हारिस को बैन देना अच्छा हुआ - लेकिन अगर ये फैसला भारत के खिलाफ होता, तो क्या वही होता?
jay mehta
दिसंबर 7, 2025 AT 02:30वाह! ये तो बहुत बड़ी बात है!!! 😍
हारिस रऊफ को दो मैच का बैन? बहुत बढ़िया!!! 🎉
सूर्यकुमार यादव को जुर्माना? बहुत अच्छा!!! 🙌
ICC ने सही फैसला किया!!! ❤️
भारत की जीत!!! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
पाकिस्तान को सबक सिखाया गया!!! 💪
हारिस को याद रखो - अगली बार इशारा मत करना!!! 😈
ये नियम बहुत अच्छे हैं!!! 🌟
अब तो हर खिलाड़ी बहुत सावधान होगा!!! 😇
Amit Rana
दिसंबर 7, 2025 AT 10:57ये फैसला सही है। हारिस के इशारे ने खेल की भावना को नुकसान पहुंचाया।
सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना भी गलत था - लेकिन जुर्माना बहुत हल्का था, जो एक संकेत था कि भावनाओं को भी समझा जा रहा है।
अगले मैचों में खिलाड़ियों को इस बारे में ट्रेनिंग देनी चाहिए - न केवल खेल के लिए, बल्कि इंसानी व्यवहार के लिए।
हम खेल को एक मंच बनाएं - जहां दोनों देश एक दूसरे के सामने आएं, लेकिन दिल से नहीं, नियम से।
Rajendra Gomtiwal
दिसंबर 7, 2025 AT 20:03हारिस को बैन मिलना बिल्कुल ठीक है। भारत के खिलाफ इशारा करना अपराध है।
लेकिन सूर्यकुमार को जुर्माना? बहुत हल्का। अगर ये भारतीय खिलाड़ी होता, तो उसे बैन मिल जाता।
ICC का न्याय बहुत ढीला है।
Yogesh Popere
दिसंबर 8, 2025 AT 01:38हारिस रऊफ को बैन देना बिल्कुल ठीक है। वो बस बदमाश है।
सूर्यकुमार का हाथ न मिलाना बहुत अच्छा था। भारत के खिलाफ इशारा करने वाले को बैन, भारतीय को जुर्माना? ये न्याय है?
बस एक तरफ नियम लागू होता है।