जब कुन्ल कमरा ने अपमानजनक बना ली एंकनथ शिंदे की सैटायर, तब BookMyShow ने उनका सारा कंटेंट हटाया और कलाकार पोर्टल से उनका प्रोफ़ाइल डिलिस्ट कर दिया। यह कदम अप्रैल 2025 की शुरुआत में आया, जब महाराष्ट्र में कई FIR दर्ज हो चुके थे और शिव सेना के युवा शाखा के महासचिव राहुल कन्नाल ने प्लेटफ़ॉर्म को सार्वजनिक निंदा की चेतावनी दी।
पृष्ठभूमि: कुन्ल कमरा और शिंदे का विवाद
कुन्ल कमरा, जो पहले Comedy Central India से जुड़ा था, 30 मार्च 2025 को मुंबई में एक स्टैंड‑अप शो में एंकनथ शिंदे (राज्य के उपमुख्यमंत्री) पर व्यंग्यात्मक गाना पेश किया। शो के दौरान “शिंदे को मार दिया” जैसी पंक्तियों को कई दर्शकों ने अनुचित कहा, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता माना। इस प्रदर्शन को मुंबई स्टैंड‑अप फेस्टिवल 2025मुंबई के हिस्से के रूप में दर्शाया गया था।
शिव सेना की युवा शाखा (युवा सेना) ने तुरंत प्रतिक्रिया में कहा कि यह गाना शिंदे की व्यक्तिगत और राजनीतिक गरिमा को ठेस पहुँचाता है। राहुल कन्नाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यदि ऐसे अपमानजनक सामग्री को प्लेटफ़ॉर्म पर रहने दिया गया तो सार्वजनिक शांति खतरे में पड़ सकती है,” और तुरंत BookMyShow से हटाने की माँग की।
BookMyShow की कार्रवाई
संचालन में, BookMyShow ने 3 अप्रैल 2025 को आधिकारिक बयान जारी किया: “हम एक तटस्थ प्लेटफ़ॉर्म हैं और सभी कलाकारों को समान अवसर देते हैं। सामग्री का चयन आयोजकों और कलाकारों की जिम्मेदारी है।” फिर भी, उसी सप्ताह में कंपनी ने कुन्ल कमरा के सभी शो, टिकट बिक्री डेटा, और प्रोफ़ाइल को डिलिस्ट कर दिया।
कुन्ल कमरा ने 7 अप्रैल को सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर दो पृष्ठों की ओपन लेटर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने लिखा, “मैं समझता हूँ कि आप राज्य के साथ अच्छा संबंध रखना चाहते हैं, पर मेरे दर्शकों के डेटा तक पहुंच बिना कारण नहीं दी जानी चाहिए।” लेटर में उन्होंने प्लेटफ़ॉर्म को दो विकल्प पेश किए: या तो उनका प्रोफ़ाइल वापस लाएँ, या फिर सभी दर्शक संपर्क विवरण उन्हें दें।
कानूनी पहलू और FIRs
शिव सेना के तहत 4 FIR दर्ज किए गए, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (सामुदायिक कलह को भड़का देना) और 2023 के भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 (सार्वजनिक क़ुचल) शामिल हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के एक विशेषज्ञ ने कहा, “इन धारा में अक्सर वैर और उत्पीड़न को रोकने के लिये उपयोग किया जाता है, पर यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ टकरा सकता है।”
कुन्ल कमरा के वकील ने भी न्यायालय में अनुरोध किया कि उनके क्लाइंट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई में भाग लेने की अनुमति दें, क्योंकि उन्हें कई मौत की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वकील ने कहा, “पुन्हा‑पुन्हा पुलिस ने शारीरिक उपस्थिति मांगी, पर सुरक्षा कारणों से यह असंभव है।” यह माँग अदालत द्वारा अभी तक समीक्षा नहीं की गई है।
प्लेटफ़ॉर्म की नीति और विशेषज्ञों की राय
BookMyShow के टर्म्स एंड कंडीशन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि “यदि कोई उपयोगकर्ता प्लेटफ़ॉर्म के नियमों का उल्लंघन करता है, तो कंपनी तुरंत उपयोगकर्ता की पंजीकरण को निलंबित या समाप्त कर सकती है।” कई डिजिटल‑मीडिया विशेषज्ञों ने इस फैसले को ‘सेंसरशिप बनाम स्थिरता’ के द्वंद्व के रूप में दर्शाया।
साइबर‑क़ानून के प्रोफेसर डॉ. अनिल सिंह ने कहा, “धारा 79(3)(b) IT अधिनियम के तहत प्लेटफ़ॉर्म को ‘टेकऑफ़” नोटिस’ मिलना सामान्य है, पर केवल तभी जब सामग्री बिनैध कारण से सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की संभावना रखती हो।” उनका मानना है कि इस मामले में प्लेटफ़ॉर्म को निष्पक्ष रूप से ‘डेटा देना’ या ‘डिलिस्टिंग’ का फैसला लेना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के चलते।
भविष्य में संभावनाएँ
कुन्ल कमरा का प्रोफ़ाइल बाद में फिर से सक्रिय किया गया, लेकिन शर्तें बदल गईं—अब वह अपने व्यक्तिगत वेबसाइट के जरिए टिकट बेच सकता है, जबकि BookMyShow केवल “सूचना प्रदान करने” वाले मध्यस्थ के रूप में रहेगा। इस घटना ने कई कलाकारों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि असमान नियमों के कारण उन्हें संभावित “प्लेटफ़ॉर्म बैन” का डर है।
मुंबई, जो भारत की सबसे बड़ी लाइव‑इवेंट हब है, में इस तरह के कदमों से बड़े अंतरराष्ट्रीय आँकड़े‑जैसे Coldplay और Guns N’ Roses—पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि प्रमोटर और राज्य सरकार के बीच तालमेल टूट सकता है। इस प्रकार, यह विवाद न केवल कॉमेडी‑सीन को, बल्कि भारतीय मनोरंजन उद्योग के व्यापक आर्थिक ढांचे को भी चुनौती देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुन्ल कमरा के शो हटाने से दर्शकों पर क्या असर पड़ेगा?
डिलिस्टिंग के कारण कई टिकटधारक अपने टिकट रिफ़ंड या पुनः बुकिंग की प्रक्रिया में उलझे रहे। प्लेटफ़ॉर्म ने कहा कि रिफ़ंड नीति लागू होगी, लेकिन कुछ दर्शकों ने देर से नोटिफ़िकेशन की शिकायत की।
क्या यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 505 व 353 के तहत FIR दायर करना संभावित रूप से संवैधानिक अधिकारों को सीमित कर सकता है, पर प्लेटफ़ॉर्म का अपना टर्म्स‑एंड‑कंडीशन भी लागू है, जिससे यह मामला जटिल बन जाता है।
BookMyShow ने आखिरकार प्रोफ़ाइल क्यों पुनर्स्थापित किया?
प्लेटफ़ॉर्म ने कहा कि डिलिस्टिंग के बाद भी कलाकार को अपनी वेबसाइट से टिकट बेचने का अधिकार है, और किसी भी ‘अन्यायपूर्ण’ प्रतिबंध को हटाने के लिये वह तैयार है, बशर्ते कलाकार की सामग्री कंपनी के नियमों का उल्लंघन न करे।
वकील ने वीडियो कॉन्फ़्रेंस की मांग क्यों की?
कुन्ल कमरा को कई मौत की धमकियों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए उनके वकील ने न्यायालय से अनुरोध किया कि सुरक्षा कारणों से वह व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि वीडियो कॉल के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकें। यह मांग अभी तक न्यायालय द्वारा स्वीकृत नहीं हुई है।
भविष्य में इसी तरह की घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि प्लेटफ़ॉर्म को स्पष्ट, पारदर्शी कंटेंट‑गाइडलाइन तैयार करनी चाहिए, और किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना केवल कानूनी मानदंडों पर कार्य करना चाहिए। साथ ही, कलाकारों को अपने डेटा की सुरक्षा हेतु वैकल्पिक बिक्री चैनल विकसित करने चाहिए।
Rahul Jha
अक्तूबर 3, 2025 AT 06:10BookMyShow ने पूरी सजा कर दी, अब कलाकारों को डर रहेगा 😡
Gauri Sheth
अक्तूबर 17, 2025 AT 03:30यह बिल्कुल असह्य है कि एक प्लेटफ़ॉर्म सत्ता के दबाव में आकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल देता है। कलाकारों ने सिर्फ़ राजनैतिक मज़ाक किया और उन्हें बैन कर दिया गया, यह हमें गहरा उदासी में डालता है। हम सबको इस तरह के सेंसरशिप के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, नहीं तो कल हम सबकी कला मौन हो जाएगी।
om biswas
अक्तूबर 30, 2025 AT 23:50इन्हें क्या पता है असली महाराष्ट्र की शान क्या है! अगर कोई हमारे नेता को मजाक में बुलाए तो सजा देना चाहिए, नहीं तो जनता का भरोसा टूटेगा। बेफ़िक्री से नहीं, लेकिन कानून के साथ खड़ा होना चाहिए।
sumi vinay
नवंबर 13, 2025 AT 21:10भाई, आपके जोश की मैं क़दर करती हूँ! लेकिन शायद हमें थोड़ा‑साफ़‑सफ़ाई से बात करनी चाहिए, ताकि सबको समझ आए कि कला और राजनीति का संतुलन कैसे बनता है। चलिए मिलकर ऐसा समाधान निकालते हैं जिससे मंच खुला रहे।
Anjali Das
नवंबर 27, 2025 AT 18:30शिंदे की इज्ज़त को ठेस पहुँचाने वाले को सख्त सजा मिलनी चाहिए; कानून ही सबको सिखाता है कि सीमा कहाँ है। प्लेटफ़ॉर्म को भी अपने सिद्धान्तों में ही टिके रहना चाहिये, बगैर राजनीति के दबाव के।
Dipti Namjoshi
दिसंबर 11, 2025 AT 15:50प्लेटफ़ॉर्म की जिम्मेदारी सिर्फ़ एक तकनीकी मध्यस्थता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसे कलाकारों के अभिव्यक्ति अधिकारों को संरक्षित करने के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा की भी रक्षा करनी चाहिए। जब कोई सामग्री संवेदनशील मुद्दे पर आधारित होती है, तो उसका मूल्यांकन वस्तुस्थिति के आधार पर होना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव से। भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मूल अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है, और इसका सीमित प्रयोग ही उचित है। इसी कारण से धारा 505 या 353 का प्रयोग अत्यधिक सावधानी से होना चाहिए, क्योंकि यह अक्सर वैरभात को रोकने के नाम पर वाकई सृजनात्मक आवाज़ों को दबा देता है। न्यायालय ने कई बार यह कहा है कि अपराधी नहीं, बल्कि अभिव्यक्तिकारियों को ही सजा नहीं देना चाहिए, जब तक कि उनके शब्द स्पष्ट रूप से हिंसा को उकसाते न हों। कुन्ल कमरा का शो शिंदे पर व्यंग्यात्मक था, लेकिन इसमें कोई स्पष्ट हिंसात्मक कदम नहीं दिखाया गया। इसलिए प्लेटफ़ॉर्म को इस सामग्री को हटाने से पहले एक स्वतंत्र समीक्षा समिति बनानी चाहिए, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, कला समीक्षक और समाजशास्त्री शामिल हों। इस प्रकार की समिति वस्तुनिष्ठ रूप से यह तय कर सकती है कि क्या सामग्री सार्वजनिक शांति को ख़तरे में डालती है या केवल विचारधारा की अभिव्यक्ति है। अगर समिति यह तय करती है कि सामग्री में अस्वीकृति के आधार पर ही हटाया गया है, तो प्लेटफ़ॉर्म को तुरंत अपने निर्णय को पुनः‑विचार करना चाहिए। कलाकारों को भी यह अधिकार होना चाहिए कि वे अपने डेटा और दर्शकों की संपर्क जानकारी को सुरक्षित रूप से प्राप्त कर सकें, बिना प्लेटफ़ॉर्म की बाध्यकारी शर्तों के। इस मामले में, कुन्ल कमरा ने एक वैकल्पिक चैनल के रूप में अपनी वेबसाइट के माध्यम से टिकट बिक्री जारी रखने का प्रस्ताव रखा, जो एक समझदार विकल्प है। विशिष्ट रूप से, प्लेटफ़ॉर्म को ऐसी लचीलापन प्रदान करनी चाहिए कि कलाकार अपनी सामग्री को पुनः पोस्ट कर सकें, बशर्ते वह नियमों के अनुरूप हो। साथ ही, सरकार को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी FIR के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया न जाए, क्योंकि यह लोकतंत्र की धड़कन को कमजोर करता है। अंत में, सभी पक्षों को मिलकर एक पारदर्शी कंटेंट‑गाइडलाइन तैयार करनी चाहिए, जिससे भविष्य में समान विवादों से बचा जा सके। इस प्रकार, हम एक समावेशी और सुरक्षित मंच का निर्माण कर सकते हैं, जहाँ कलाकार भी सुरक्षित महसूस करें और दर्शक भी संतुष्ट रहें।
Prince Raj
दिसंबर 25, 2025 AT 13:10Dipti जी द्वारा उल्लिखित संरचनात्मक समीक्षा समिति का प्रस्ताव वास्तव में इकोसिस्टम के भीतर एक गवर्नेंस लेयर स्थापित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। यह मॉडरेशन फ्रेमवर्क डेटा कॉम्प्लायंस, एआई‑ड्रिवेन फ़्लैगिंग और मानवीय ओवरराइड को संतुलित कर सकता है, जिससे प्लेटफ़ॉर्म और कलाकार दोनों को स्पष्ट कार्यप्रणाली मिलती है।