10 मई 2026 की सुबह चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में एक ऐसा इतिहास रचा गया जिसकी शुरुआत से पिछले छह दशकों की राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गई। सी. जोसेफ विजय, पार्टी अध्यक्ष of तमिलगा वेत्त्री कड़गम (TVK), ने राज्यपाल द्वारा दी गई शपथ लेते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर हाथ रखे। यह केवल एक नई सरकार का गठन नहीं था; 1967 के बाद पहली बार किसी गैर-द्रविड़ दल का नेता इस पद पर पहुंचा है।
राज्य की राजनीति में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का लंबे समय से वर्चस्व रहा है। लेकिन विजय का यह जीत दर्शन उस संप्रदायवादी राजनीति को तोड़ने का संकेत देता है। यहाँ बातचीत थोड़ी अलग थी - भावनाएं उच्च थीं, और हवाओं में भी एक नए अध्याय की सुगंध थी।
चुनावी जीत और गठबंधन की रणनीति
4 मई 2026 को हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सीटों में से 108 सीटें जीतीं। बहुमत के लिए आवश्यक सीमा 118 थी, इसलिए विजय को अकेले सरकार बनाने में असफल रहना पड़ा था। लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति पर खरा उतरे। 9 मई को उन्होंने राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर, राज्यपाल से मुलाकात की और 121 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा।
- कांग्रेस: 5 विधायक
- VCK: 2 विधायक
- IUML: 2 विधायक
- CPI: 2 विधायक
- CPM: 2 विधायक
इन छोटी पार्टियों और कांग्रेस के समर्थन ने उन्हें कुल 120 विधायकों का आधार दिया, जिससे सरकार गठन संभव हुआ। यह एक साधारण गठबंधन नहीं था; यह एक विचारधारात्मक बदलाव था। विजय ने चेन्नई और कोयंबटूर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की, जो उनकी लोकप्रियता का प्रमाण था।
मंत्रिमंडल का चेहरा: अनुभव और युवा प्रतिभा
शपथ ग्रहण समारोह में कुल 12 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें TVK के 8 विधायक और कांग्रेस के 3 विधायक शामिल थे। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं और युवा प्रतिभाओं का मिश्रण था।
के. ए. सेंगोट्टैन, जो AIADMK के वरिष्ठ नेता रहे और 8 बार विधायक चुने गए, अब TVK के साथ जुड़कर मंत्री बने हैं। उनका अनुभव नई सरकार को स्थिरता देने वाला है। वहीं, मदुरै सेंट्रल से विधायक बने मुस्ताफा टीवी डिबेट्स में पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे हैं।
लेकिन सबसे चर्चित नाम एस. कीर्तना का है। सिवकाशी से जीत दर्ज करने वाली 29 वर्षीय कीर्तना TVK की सबसे युवा विधायक और मंत्री हैं। उनका चयन दिखाता है कि विजय युवाओं को महत्व दे रहे हैं। अन्य प्रमुख चेहरों में आधव अर्जुन और एन. आनंद भी शामिल हैं, जो पार्टी के संगठन की रीढ़ माने जाते हैं।
इतिहास में नया अध्याय
1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़वाद के इर्द-गिर्द घूमती रही है। DMK और AIADMK ने लगभग हर चुनाव में आपस में प्रतिस्पर्धा की है। विजय की जीत इस पैटर्न को तोड़ती है। यह केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत है।
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उपस्थित थे। उनका आगमन राष्ट्रीय स्तर पर इस बदलाव को मान्यता देने का संकेत था। सड़कों पर उत्साह छाया हुआ था, लोग जश्न मना रहे थे। दो साल पुरानी पार्टी के पहले ही चुनाव में ऐसा प्रदर्शन करना आसान नहीं था।
आगे क्या?
विजय सरकार के सामने कई चुनौतियाँ हैं। अल्पसंख्यक सरकार होने के नाते, उन्हें अपने गठबंधन को बनाए रखना होगा। किसानों की मांगें, बेरोजगारी, और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दे अब उनके ध्यान केंद्र में होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर विजय अपनी वायदों पर अमल करते हैं, तो यह सरकार तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे सकती है। लेकिन अगर वे अपने गठबंधन को नहीं संभाल पाते, तो अस्थिरता का खतरा बना रहेगा।
Frequently Asked Questions
क्यों सी. जोसेफ विजय तमिलनाडु के पहले गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री हैं?
1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) जैसे द्रविड़वादी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा पर आधारित रही है। विजय की TVK एक गैर-द्रविड़ दल है, इसलिए उनका मुख्यमंत्री बनना ऐतिहासिक है।
TVK ने कैसे सरकार बनाई जब उसके पास बहुमत नहीं था?
चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतीं, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता थी। विजय ने कांग्रेस (5), VCK (2), IUML (2), CPI (2) और CPM (2) सहित अन्य दलों के समर्थन प्राप्त किया, जिससे उनका कुल विधायक आधार 120 हो गया।
विजय के मंत्रिमंडल में किन प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया?
मंत्रिमंडल में AIADMK के पूर्व वरिष्ठ नेता के. ए. सेंगोट्टैन, युवा विधायक एस. कीर्तना (29 वर्ष), और टीवी चेहरा मुस्ताफा शामिल हैं। इसके अलावा आधव अर्जुन और एन. आनंद जैसे पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों को भी मंत्री बनाया गया है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर ने शपथ ग्रहण में क्या भूमिका निभाई?
राज्यपाल ने 9 मई को विजय से मुलाकात की और समर्थन पत्र प्राप्त करने के बाद 10 मई को चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया। उन्होंने विजय और अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
क्या विजय सरकार स्थिर रहेगी?
विजय सरकार अल्पसंख्यक है और विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों पर निर्भर है। यदि वे अपने गठबंधन को बनाए रखते हैं और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करते हैं, तो स्थिरता संभव है। अन्यथा, राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बना रहेगा।