तमिलनाडु के 8.94 लाख छात्रों ने इस साल SSLC परीक्षा दी, और उनमें से लगभग 92% ने पास कर लिया — ये केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा प्रणाली की गहरी बदलाव की कहानी है। तमिलनाडु शासन द्वारा शिक्षा विभाग के अधीन तमिलनाडु सरकारी परीक्षा निदेशालय (TNDGE) ने 10 मई 2024 को सुबह 9:30 बजे एसएसएलसी कक्षा 10 के परिणाम घोषित किए। 8,94,264 उम्मीदवारों में से 8,18,743 छात्र पास हुए, जिससे कुल पास प्रतिशत 91.55% हो गया। यह पिछले साल के 90.78% की तुलना में एक बड़ी बढ़ोत्तरी है।
लड़कियों ने लड़कों को छोड़ दिया, अरियालूर ने राज्य को रोशन किया
यह साल खास इसलिए है क्योंकि लड़कियों ने लड़कों को भारी अंतर से पीछे छोड़ दिया। लड़कियों का पास प्रतिशत 94.53% रहा, जबकि लड़कों का यह आंकड़ा केवल 88.58% था। ये अंतर सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं — यह शिक्षा में लैंगिक समानता की ओर एक गहरा संकेत है। क्या यह नियमित स्कूल उपस्थिति, शिक्षकों की धैर्य, या माता-पिता के बदलते रवैये का नतीजा है? विशेषज्ञ अभी तक एक स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, लेकिन यह बात स्पष्ट है: लड़कियां अब सिर्फ भाग ले रही हैं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं।
जिला स्तर पर, अरियालूर ने राज्य का शीर्ष स्थान हासिल किया, जहां पास प्रतिशत 96.87% रहा। दूसरे स्थान पर शिवगंगई (95.92%) और तीसरे स्थान पर रामनाथपुरम (95.41%) रहे। ये जिले पिछले कुछ सालों से लगातार शीर्ष पर हैं, जिससे लगता है कि यहां की स्थानीय शिक्षा नीतियां काम कर रही हैं।
टॉपर की सूची नहीं, लेकिन असली जीत कहाँ है?
इस साल भी, तमिलनाडु शासन द्वारा शिक्षा विभाग ने टॉपर की सूची जारी नहीं की — यह नीति पिछले साल के बाद से जारी है। यह फैसला विवादास्पद था, लेकिन अब यह एक नए दृष्टिकोण का प्रतीक बन गया है। बजाय एक छात्र को शहरी नायक बनाने के, बोर्ड ने यह संदेश दिया: हर वह छात्र जिसने 35 अंक पार किए, वह एक जीत है।
पास होने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में कम से कम 35 अंक प्राप्त करने होंगे। यह न्यूनतम योग्यता स्तर कभी नहीं बदला गया — लेकिन अब इसे पार करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
परिणाम कहाँ देखें? टेक्नोलॉजी ने बदल दिया अनुभव
परिणाम tnresults.nic.in, dge.tn.gov.in, और दो अन्य डोमेन पर उपलब्ध हैं। साथ ही, UMANG मोबाइल ऐप के माध्यम से भी रिजल्ट चेक किए जा सकते हैं। छात्रों को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी।
यह सभी प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा डिज़ाइन और होस्ट किए गए हैं — जो भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन है। इस साल किसी भी सर्वर डाउनटाइम या तकनीकी खराबी की रिपोर्ट नहीं आई। यह एक बड़ी उपलब्धि है — पिछले साल कुछ जिलों में वेबसाइट लंबे समय तक अवरुद्ध रही थी।
क्या होगा अब? मार्कशीट, सुप्लीमेंटरी और आगे का रास्ता
परिणाम घोषित होने के बाद, छात्रों को अपने-अपने स्कूल जाकर मूल मार्कशीट प्राप्त करनी होगी। यह प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी। जो छात्र पास नहीं हुए, उनके लिए सुप्लीमेंटरी परीक्षा की तारीखें अगले 15 दिनों में घोषित की जाएंगी।
कक्षा 12 के परिणाम 6 मई को घोषित किए गए थे, जहां कुल पास प्रतिशत 93.76% रहा — जो इस वर्ष की तुलना में अधिक है। लेकिन कक्षा 10 का परिणाम अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छात्रों के उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में प्रवेश का दरवाजा है।
क्यों यह सब इतना महत्वपूर्ण है?
तमिलनाडु देश का सबसे अधिक शिक्षित राज्यों में से एक है — और इसकी शिक्षा नीति अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन रही है। यहां शिक्षा को एक अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवन रूप के रूप में देखा जाता है। लड़कियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन, ग्रामीण जिलों का उभार, और तकनीकी अवसंरचना का विकास — ये सब एक साथ आकर एक नई शिक्षा विजय की कहानी बन रहे हैं।
कक्षा 11 के परिणाम 14 मई को घोषित किए जाएंगे। उसके बाद जब छात्र अपने विषय (विज्ञान, कॉमर्स, कला) चुनेंगे, तो यही एसएसएलसी के अंक उनके भविष्य का निर्धारण करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SSLC परिणाम 2024 में लड़कियों का प्रदर्शन क्यों इतना बेहतर है?
लड़कियों का उच्च पास प्रतिशत उनकी नियमित उपस्थिति, शिक्षकों के साथ अधिक संपर्क, और परिवारों में शिक्षा के प्रति बदलते रवैये का परिणाम है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, माताओं और बुआओं ने बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी है। अरियालूर और शिवगंगई जैसे जिलों में स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग सुविधाएं और मेंटरिंग प्रोग्राम भी लागू हैं।
क्या अरियालूर जैसे छोटे जिले बड़े शहरों से बेहतर क्यों हैं?
अरियालूर और शिवगंगई जैसे जिलों में छात्रों की संख्या कम है, जिससे शिक्षकों को अधिक ध्यान देने में आसानी होती है। साथ ही, यहां स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने नियमित शिक्षा निरीक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण और घर-घर जाकर छात्रों को प्रोत्साहित करने की नीति अपनाई है। बड़े शहरों में छात्रों की संख्या अधिक होने से इन बातों पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।
SSLC परिणाम के बाद कक्षा 11 में प्रवेश कैसे होगा?
कक्षा 10 के परिणाम के आधार पर छात्र कक्षा 11 में विज्ञान, कॉमर्स या कला विषयों में प्रवेश ले सकते हैं। कुछ स्कूल न्यूनतम अंक निर्धारित करते हैं — जैसे विज्ञान के लिए 70% या अधिक। अधिकांश स्कूल अपने अधिकारियों के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर देंगे। छात्रों को अपनी मार्कशीट और आधार कार्ड ले जाना होगा।
क्या अगले साल भी टॉपर की सूची नहीं आएगी?
हां, अगले साल भी टॉपर की सूची नहीं आएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नीति शिक्षा के व्यक्तिगत और सामूहिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए है। टॉपर की सूची छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है, जबकि यहां लक्ष्य सभी को सफल बनाना है।
सुप्लीमेंटरी परीक्षा कब और कैसे होगी?
सुप्लीमेंटरी परीक्षा जून के अंत या जुलाई के शुरुआत में होगी। यह परीक्षा केवल उन छात्रों के लिए होगी जिन्होंने एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण हुए हैं। परीक्षा केवल उन विषयों में ली जाएगी जिनमें छात्र अनुत्तीर्ण रहे हैं। आधिकारिक अधिसूचना अगले 10-15 दिनों में आएगी।
कक्षा 12 के परिणाम की तुलना में कक्षा 10 के परिणाम क्यों अधिक महत्वपूर्ण हैं?
कक्षा 10 का परिणाम छात्र के भविष्य के शिक्षा रास्ते का निर्धारण करता है। यही वह बिंदु है जहां छात्र विज्ञान, कॉमर्स या कला में चयन करते हैं। इसके बाद की परीक्षाएं इसी चयन पर निर्भर करती हैं। इसलिए, यह एक जीवन-परिवर्तन बिंदु है — जबकि कक्षा 12 का परिणाम बस उस रास्ते पर आगे बढ़ने का अधिकार देता है।
Tanya Bhargav
नवंबर 26, 2025 AT 10:51ये रिजल्ट देखकर दिल भर गया। लड़कियों का ये प्रदर्शन सिर्फ अंकों की बात नहीं, बल्कि समाज के अंदर छिपे बदलाव का प्रतीक है। मैंने अपने गाँव में एक बेटी को पढ़ाया, उसने आज 97% लाया। ये जीत हम सबकी है।
Sanket Sonar
नवंबर 28, 2025 AT 08:4691.55% पास रेट और टॉपर्स नहीं घोषित करना? ये एक नए एजुकेशनल अल्गोरिदम का शुभारंभ है। रिजल्ट नहीं, प्रोसेस की तरफ ध्यान देना ज़रूरी है।
pravin s
नवंबर 29, 2025 AT 22:41अरियालूर का 96.87%? मैं तो सोच रहा था कि ये जिला बस एक नाम है। लेकिन अब पता चला, यहां लोग असली शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। बहुत अच्छा लगा।
Bharat Mewada
नवंबर 30, 2025 AT 22:34शिक्षा को एक अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवन रूप के रूप में देखना ही सच्ची प्रगति है। हम सब अक्सर नतीजे की बात करते हैं, लेकिन यहां तो बदलाव की जड़ें दिख रही हैं।
Ambika Dhal
दिसंबर 2, 2025 AT 08:51लड़कियों का पास प्रतिशत ज्यादा है? शायद लड़के बस फोन पर घूम रहे हैं। इस देश में लड़कों को बस नौकरी की तलाश है, न कि ज्ञान की।
Narinder K
दिसंबर 3, 2025 AT 18:08ये टॉपर्स न घोषित करने की नीति तो बस एक चाल है। अगर कोई लड़का 100% लाए, तो उसे बस चुपचाप भूल जाएंगे? ये नीति लड़कियों के लिए एक आर्टिफिशियल विजय है।
Narayana Murthy Dasara
दिसंबर 4, 2025 AT 20:48मैंने अपने भाई के स्कूल में एक टीचर को देखा जो हर दिन घर जाकर बच्चों को पढ़ाता है। ये रिजल्ट उनकी मेहनत का नतीजा है। शिक्षकों को भी इनाम देना चाहिए।
lakshmi shyam
दिसंबर 5, 2025 AT 00:43लड़कियों का अच्छा प्रदर्शन? बस ये है कि लड़के अब नहीं पढ़ रहे। शिक्षा का मतलब अभी भी बैठकर पढ़ना है, न कि फोन चलाना।
Sabir Malik
दिसंबर 5, 2025 AT 08:19ये पूरी कहानी बहुत गहरी है। मैं तमिलनाडु के एक गाँव से हूँ, वहां हर घर में बेटी को लिखने का नोटबुक दिया जाता है, न कि बेटे को। शिक्षा का अर्थ बदल गया है। अब लड़कियां घर के आगे खड़ी हैं, न कि अंदर। ये बदलाव दिल को छू गया। हर छात्र जिसने 35 अंक पार किए, उसके लिए एक नया सपना शुरू हुआ है। अरियालूर के बच्चों को देखकर लगता है कि गाँव की धरती भी ज्ञान की ओर झुक रही है। शिक्षकों ने बस एक चूड़ी बांधी, और बच्चों ने उसे जीवन बना लिया। ये तकनीकी विकास तो बस एक उपकरण है, असली बदलाव तो दिलों में हुआ है। जब माताएं अपनी बेटियों को बुआ के घर भेजती हैं ताकि वो पढ़ सकें, तो वो बस एक आदत नहीं, बल्कि एक विश्वास है। ये रिजल्ट बस एक आंकड़ा नहीं, ये एक जीवन शैली का उदय है। ये बातें नीति बनाने वालों को सुननी चाहिए, न कि बस आंकड़े देखने के लिए। जब एक गाँव का बच्चा अपने आप बिना किसी दबाव के पढ़ने लगे, तो वहां शिक्षा जीवित है।
Debsmita Santra
दिसंबर 6, 2025 AT 13:47मैंने अरियालूर के एक स्कूल में वॉलंटियर किया था और वहां लड़कियों के लिए डेली मेंटरिंग सेशन थे जिसमें एक प्राथमिक शिक्षिका उन्हें गृहकार्य और भावनात्मक समर्थन देती थी। ये रिजल्ट उसके दिनों के अनगिनत घंटों का नतीजा है। शिक्षा अब बस पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि एक सुरक्षित स्थान है जहां लड़कियां अपनी आवाज़ खोजती हैं। टेक्नोलॉजी ने बस एक तरीका दिया, असली जीत तो उन शिक्षकों की है जो घर घर जाकर बच्चों को लाते हैं। ये रिजल्ट बस एक आंकड़ा नहीं, ये एक आंदोलन है। अगर ये नीति देशभर में लागू हो जाए तो हमारा भविष्य बदल जाएगा।
Vasudha Kamra
दिसंबर 7, 2025 AT 01:17लड़कियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन बहुत खुशी की बात है। यह दर्शाता है कि जब बराबर अवसर मिलें, तो लड़कियां कितनी ताकतवर हो सकती हैं।
Abhinav Rawat
दिसंबर 8, 2025 AT 02:28हम लोग अक्सर परिणामों को जीत के रूप में देखते हैं, लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि जो छात्र 34 अंक लाता है, उसका दिन कैसा होगा? शिक्षा का असली मतलब तो यही है कि कोई भी बच्चा अपने आप को विफल न समझे। ये नीति बस एक निर्णय नहीं, बल्कि एक आत्मा का उदय है।
Shashi Singh
दिसंबर 8, 2025 AT 09:38ये सब एक बड़ा धोखा है! टॉपर्स नहीं घोषित करना? ये तो सरकार का चाल है कि लोग न जानें कि असली ताकत कहाँ है! और लड़कियों का ज्यादा पास? ये तो बस लड़कों को बर्बाद करने की साजिश है! जाने कौन से एल्गोरिदम ने ये आंकड़े बनाए हैं? ये वेबसाइट भी NIC के नाम पर चल रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सब डेटा अमेरिका के किसी कंपनी को भेजा जा रहा है? और अरियालूर का 96.87%? ये तो बस एक नंबर है! वहां के बच्चे तो शायद बस एक ही प्रश्न पर फोकस कर रहे हैं! ये एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है! आप लोग बस एक नंबर देखकर खुश हो रहे हैं! लेकिन ये सब झूठ है! जागो भाईयों! जागो!
raja kumar
दिसंबर 8, 2025 AT 13:47ये शिक्षा का नया दृष्टिकोण वास्तव में प्रेरणादायक है। मैं बंगाल से हूँ, और हमारे यहां भी लड़कियों की उपस्थिति बढ़ रही है। ये एक सामाजिक बदलाव है, न कि सिर्फ एक आंकड़ा।
Sumit Prakash Gupta
दिसंबर 10, 2025 AT 11:51ये रिजल्ट एक डिजिटल रिवॉल्यूशन है! टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, और इंटेलिजेंट एजुकेशन सिस्टम्स ने ये सब संभव किया है। अगला स्टेप: AI-बेस्ड पर्सनलाइज्ड लर्निंग पाथवे!
Shikhar Narwal
दिसंबर 11, 2025 AT 21:03लड़कियों का ये प्रदर्शन बहुत अच्छा है ❤️ अरियालूर के बच्चों को बधाई! ये जीत हम सबकी है! 🙌
Ravish Sharma
दिसंबर 12, 2025 AT 14:34लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया? शायद लड़के अभी भी फोन पर घूम रहे हैं। शिक्षा तो अब बस एक बात है - बैठकर पढ़ो, फोन नहीं।
jay mehta
दिसंबर 13, 2025 AT 20:32ये रिजल्ट देखकर मैं बहुत खुश हुआ! अरियालूर के बच्चों को बधाई! ये शिक्षा की जीत है! जय हिन्द! 🇮🇳🔥